ब्रिक्स सम्मेलन में भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना खाद्य सुरक्षा संभव नही

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी और स्वच्छता के प्रतीक इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को आगे बढ़ाते हुए दुनिया को एक परिवार मानकर शांति, समन्वय और साझेदारी आधारित विकास पर जोर दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी मौजूद रहे।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में “अतिथि देवो भवः” की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का समर्थक रहा है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दृष्टिकोण “युद्ध नहीं, शांति; संघर्ष नहीं, समन्वय” पर आधारित है, जो वैश्विक कृषि सहयोग के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह मंच विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बाजार की अनिश्चितताओं का सामूहिक समाधान खोजने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि छोटे किसान मजबूत होंगे तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ होगी।
शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि देश का कुल खाद्य उत्पादन बढ़कर लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन, बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक और मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन से ऊपर पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित करता है, जिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय किसानों के कठिन परिश्रम और सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों को दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में लगभग 43% कार्यबल कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उन्नत बीज, सिंचाई, आधुनिक तकनीक और किसान सहायता कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिला है।
उन्होंने बताया कि देश के लगभग 87% किसान छोटे और सीमांत किसान हैं और इन्हें सशक्त बनाना समावेशी विकास की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए चौहान ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने मध्य प्रदेश से शुरू किए गए “खेत बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट्स के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
महिला सशक्तिकरण को कृषि विकास का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ पहल को ग्रामीण भारत में तकनीकी और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
युवाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इससे कृषि अधिक आधुनिक, लाभकारी और आकर्षक बन रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिक्स देशों से छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संवाद अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग के माध्यम से वैश्विक कृषि को नई दिशा प्रदान करेगा।