पीएम मोदी के आह्वान को शिवराज सिंह ने बताया राष्ट्र पुनर्निर्माण का महायज्ञ

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के आह्वान को राष्ट्र पुनर्निर्माण का महायज्ञ बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसे राष्ट्रभक्त हैं, जो पहले स्वयं को कसौटी पर कसते हैं और उसके बाद ही देशवासियों से कोई आह्वान करते हैं।
नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक अधिकारी कम से कम पांच परिवारों को “लोकल फॉर वोकल” और “स्वदेश अभियान” से जोड़ने के लिए प्रेरित करे। उन्होंने कहा कि मंत्रालय स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही विदेश यात्राएं की जाएं और अधिकतर बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने का प्रयास किया जाए। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-ऑफिस प्रणाली को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल की संभावनाओं का आकलन किया जाए, लेकिन इससे काम प्रभावित नहीं होना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान ने अपने वाहनों के काफिले को भी कम कर दिया है। अब उनके काफिले में केवल तीन वाहन शामिल रहेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों में विदेश जाने के बजाय देश के भीतर पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत प्राकृतिक सुंदरता और विविधता से भरपूर है। उन्होंने मेट्रो, सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों के उपयोग को मंत्रालय स्तर पर प्रोत्साहित करने की भी बात कही।
खेती में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, लेकिन उनका विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए आईसीएआर के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में 1657 टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक और प्रशिक्षित करेंगी। इसके साथ ही “खेत बचाओ समितियों” का भी गठन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सही तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने पर उत्पादन में कमी नहीं आती है। वर्तमान में देश में 8 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर लगभग 18 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश की कम से कम 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर अपनी 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह करेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शी नेता हैं, जो केवल वर्तमान नहीं बल्कि आने वाले 50 वर्षों के भारत के बारे में सोचते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में उठाया गया हर कदम देश के पुनर्निर्माण के महायज्ञ में योगदान है। बैठक के अंत में अधिकारियों को इन सभी बिंदुओं पर जल्द विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।