समुद्री क्षेत्र में भारत की ताकत बढ़ी, कामराजार पोर्ट ने हासिल की नई क्षमता

नई दिल्ली। कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने ‘कैपिटल ड्रेजिंग फेज VI’ परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर 18 मीटर परिचालन ड्राफ्ट क्षमता हासिल कर ली है। इसके साथ ही कामराजार बंदरगाह, विशाखापत्तनम बंदरगाह के बाद देश का दूसरा प्रमुख बंदरगाह बन गया है, जहां 18 मीटर ड्राफ्ट वाले बड़े जहाजों का संचालन संभव होगा। अब यह बंदरगाह 1,70,000 टन तक भार ढोने वाले विशाल कैपसाइज जहाजों को संभाल सकेगा।
440 करोड़ रुपए के निवेश से पूरी हुई ड्रेजिंग परियोजना
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समुद्री क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मैरिटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत देश में विश्वस्तरीय बंदरगाह और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 18 मीटर ड्राफ्ट क्षमता वाला देश का दूसरा प्रमुख बंदरगाह बनना कामराजार पोर्ट की आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार समुद्री अवसंरचना की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बड़े कैपसाइज जहाजों के संचालन की बढ़ी क्षमता
‘कैपिटल ड्रेजिंग फेज VI’ परियोजना को लगभग 440 करोड़ रुपए के निवेश से पूरा किया गया है। इसके तहत बाहरी पहुंच मार्ग की गहराई 20 मीटर से बढ़ाकर 23 मीटर और आंतरिक प्रवेश मार्ग की गहराई 19 मीटर से बढ़ाकर 22 मीटर की गई है। इसके अलावा 18 मीटर ड्राफ्ट वाले जहाजों के संचालन के लिए बर्थ, हार्बर बेसिन और संबंधित नौवहन क्षेत्रों को भी विकसित किया गया है।
माल ढुलाई लागत घटाने और व्यापार बढ़ाने में मिलेगी मदद
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि परियोजना पूरी होने से कामराजार पोर्ट अब पूरी तरह लदे 1,70,000 टन तक के कैपसाइज जहाजों को संभालने में सक्षम हो गया है। इससे माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, लॉजिस्टिक लागत कम होगी और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बंदरगाह भारत के आयात-निर्यात व्यापार के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।
समुद्री क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति होगी मजबूत
बढ़ी हुई ड्राफ्ट क्षमता से जहाजरानी कंपनियां बड़े जहाजों का संचालन कर सकेंगी। इससे बड़े पैमाने पर कार्गो परिवहन संभव होगा और परिचालन दक्षता में सुधार आएगा। कामराजार पोर्ट की ‘केप कंप्लायंट’ गहराई इसे भारी मात्रा में कार्गो संभालने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के बंदरगाहों की श्रेणी में शामिल करती है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों के बीच इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
भारत के समुद्री विकास अभियान को मिलेगी नई गति
कामराजार पोर्ट की यह उपलब्धि भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक व्यापार में देश की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आधुनिक बंदरगाह क्षमता से देश की आर्थिक वृद्धि और समुद्री व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।