नई दिल्ली। भारत के केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के ‘ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस’ के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए सुरक्षित, भरोसेमंद, जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व्यवस्था की वकालत की। उन्होंने कहा कि एआई का विकास मानव-केंद्रित, अधिकारों का सम्मान करने वाला और सभी देशों, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की भागीदारी सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए।
मानव-केंद्रित एआई गवर्नेंस पर दिया जोर
कीर्ति वर्धन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि एआई के नियम और प्रबंधन ऐसे होने चाहिए जो इंसानों को केंद्र में रखें, सभी को साथ लेकर चलें और भरोसे पर आधारित हों। उन्होंने कहा कि एआई के विकास में मानवीय निगरानी, मानवाधिकारों का सम्मान और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही तकनीक और संसाधनों की कमी को दूर करना भी जरूरी है, ताकि ग्लोबल साउथ के देश भी एआई के भविष्य को आकार देने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
सुरक्षित और जिम्मेदार एआई के लिए भारत की प्रतिबद्धता
विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि भारत ऐसे एआई भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है, जो सुरक्षित, भरोसेमंद, जिम्मेदार और सभी के लिए समावेशी हो। उन्होंने कहा कि एआई का विकास वैश्विक सहयोग और साझा जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए, ताकि इसका लाभ पूरी मानवता तक पहुंच सके।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का किया नेतृत्व
कीर्ति वर्धन सिंह ने 6 और 7 जुलाई को जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के ‘ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस’ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। यह मंच एआई के वैश्विक नियमन और सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
यूएन के नए मंच का उद्देश्य
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस’ संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 के तहत स्थापित एक सार्वभौमिक और बहु-हितधारक मंच है। इसका गठन सितंबर 2024 में अपनाए गए ‘ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट’ और ‘पैक्ट ऑफ द फ्यूचर’ के बाद किया गया। इसका उद्देश्य एआई गवर्नेंस से जुड़े विभिन्न देशों, क्षेत्रीय संगठनों और अन्य हितधारकों के प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
वैज्ञानिक पैनल करेगा पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत
विदेश मंत्रालय ने बताया कि ‘इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल साइंटिफिक पैनल ऑन एआई (आईआईएसपीए)’ एआई की वैज्ञानिक समझ, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। यह पैनल विशेष रूप से विकासशील देशों की क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा, ताकि एआई का उपयोग सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में प्रभावी ढंग से किया जा सके।
नई दिल्ली में भी हुई थी हितधारकों की बैठक
मंत्रालय के अनुसार, एआई गवर्नेंस से जुड़े वैश्विक ढांचे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के तहत विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किए गए। इसी क्रम में फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान भी एक प्रत्यक्ष बैठक आयोजित की गई थी।