सरायपाली। इंडसइंड बैंक की सरायपाली शाखा के शाखा प्रबंधक सुजीत शनिकर, कैशियर गुणसागर, रायगढ़ की रेपो एजेंसी से जुड़े भरत यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ बैंक ग्राहक लोकनाथ पटेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए क्षेत्रीय प्रमुख (Regional Head), इंडसइंड बैंक लिमिटेड, रायपुर को शिकायत की है। शिकायत में ट्रक सीज करने, फोरक्लोजर राशि में कथित गड़बड़ी, अवैध वसूली, रिश्वत मांगने, धमकी देने, रकम के हिसाब में अनियमितता और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसके नाम पर बैंक से दो ट्रक फायनेंस हैं। इनमें CG06GT3467 को बेचकर उसका लोन फोरक्लोज करना था, जबकि CG06HA7227 का लोन नियमित रूप से चल रहा था। शिकायत में दोनों वाहनों के लोन खातों का भी उल्लेख किया गया है।
17.50 लाख में ट्रक का सौदा, फोरक्लोजर राशि पर सवाल




शिकायत के अनुसार 2 जून 2026 को बैंक प्रबंधक ने ट्रक CG06GT3467 के लिए एक खरीदार तय किया और करीब 17.50 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे खरीदार से सीधे बातचीत करने का अवसर नहीं दिया गया। इसके बाद फोरक्लोजर राशि करीब 18.50 लाख रुपए बताई गई। आरोप है कि शाम के समय कुटेला ब्रिज के पास बैंक प्रबंधक ने एजेंट पुरुषोत्तम साहू और विद्या साहू की मौजूदगी में वाहन संबंधी प्रक्रिया पूरी कराई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन्वेंट्री पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए गए, लेकिन उसकी प्रति नहीं दी गई। रात करीब 11:30 बजे वाहन को सरायपाली यार्ड में खड़ा करा दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि 3 जून को खरीदार से 60 हजार रुपए नकद लेकर एक किस्त खाते में जमा कराई गई।
फोरक्लोजर राशि में 3 लाख अधिक दिखाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 7 से 12 जून के बीच जब वह फोरक्लोजर के लिए बैंक पहुंचा तो शाखा प्रबंधक ने सिस्टम से सीधे राशि बताने के बजाय कैशियर के ई-मेल से अपने ई-मेल पर जानकारी मंगाई। शिकायत के अनुसार इसमें वास्तविक देय राशि से करीब 3 लाख रुपए अधिक राशि दिखाई गई।
आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने कंपनी से वेवर/डिस्काउंट दिलाने की बात कहते हुए कथित तौर पर 1 लाख रुपए की मांग की। शिकायतकर्ता द्वारा राशि देने से इनकार करने पर कथित रूप से धमकी दी गई कि भविष्य में उसे बुरा परिणाम भुगतना पड़ेगा और वह गाड़ी नहीं चला पाएगा।
इसके बाद 16 जून को कथित फोरक्लोजर लेटर दिखाकर कंपनी से 3 लाख रुपए की वेवर मंजूर कराने का दावा किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वास्तविकता में यह राशि बैंक के सिस्टम में देय ही नहीं थी और अतिरिक्त राशि दिखाकर उसे भ्रमित किया गया।
1.03 लाख काटे, दूसरे खाते में 70 हजार डालने का आरोप
शिकायत में 25 जून की घटना का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता के अनुसार बैंक कर्मचारी विद्या साहू उसे महासमुंद आरटीओ कार्यालय लेकर गईं, जहां वाहन के नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया की गई। शिकायतकर्ता ने अंतर की राशि को दूसरे चालू ट्रक CG06HA7227 के लोन में समायोजित करने की बात कही थी।
आरोप है कि बैंक की ओर से 1,03,000 रुपए ट्रक CG06GT3467 के खाते से काटे गए। इसके बाद 26 जून की रात 8:56 बजे केवल 70 हजार रुपए दूसरे ट्रक CG06HA7227 के लोन खाते में ट्रांसफर किए गए। शिकायतकर्ता ने शेष राशि के संबंध में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है।
54 हजार रुपए के हिसाब पर विवाद
शिकायतकर्ता के अनुसार 2 जुलाई को स्टेटमेंट लेने पर उसे पता चला कि बैंक की ओर से 34 हजार रुपए का वेवर दिया गया था, जबकि हिसाब में करीब 20 हजार रुपए अतिरिक्त का अंतर था। इस तरह कुल 54 हजार रुपए के अंतर को लेकर बैंक में विवाद हुआ।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने बैंक शाखा में सीसीटीवी के सामने कथित रिश्वत मांगने का विरोध किया और पुलिस में शिकायत करने की बात कही। इसके बाद कथित रूप से रकम वापस की गई और उसे धमकी दी गई। शिकायत में शाखा प्रबंधक द्वारा अपने पद का हवाला देते हुए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है।
6 अगस्त को दूसरे ट्रक को जबरन सीज करने का आरोप
शिकायत का सबसे गंभीर आरोप 6 अगस्त 2026 की घटना से जुड़ा है। लोकनाथ पटेल के अनुसार उनका चालू ट्रक CG06HA7227 बैंक शाखा प्रबंधक, रायगढ़ रेपो एजेंट भरत यादव और उनके चार अन्य साथियों द्वारा जबरन सीज कर लिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वाहन को सीज करने से पहले उसे NPA नोटिस नहीं दिया गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वाहन जब्त किए जाने के करीब एक सप्ताह बाद खाते को NPA दर्शाया गया। शिकायतकर्ता ने इसे बैंकिंग नियमों के विपरीत बताते हुए जांच की मांग की है।
तीन साल के सभी खातों का फॉरेंसिक ऑडिट मांगा
शिकायतकर्ता ने शाखा प्रबंधक पर ग्राहकों से कथित अवैध वसूली और धोखाधड़ी के आरोप लगाते हुए एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। उसने कहा है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान इंडसइंड बैंक की सरायपाली शाखा के सभी ग्राहकों के खातों और किए गए सभी Waiver का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस ऑडिट से यह पता चल सकेगा कि वेवर के नाम पर कहीं अन्य ग्राहकों से भी अतिरिक्त राशि तो नहीं ली गई। यदि अन्य ग्राहक भी इस तरह की कथित अनियमितता के शिकार हुए हैं तो उन्हें भी न्याय मिल सकेगा।
विजिलेंस जांच और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
लोकनाथ पटेल ने बैंक की Vigilance Team से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने 7 जून से 16 जून के बीच शाखा प्रबंधक और कैशियर के ई-मेल, कंप्यूटर सिस्टम तथा संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। साथ ही 2 अगस्त 2026 और अन्य संबंधित दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखकर जांच में शामिल करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने सीज किए गए ट्रक CG06HA7227 को बिना अतिरिक्त शुल्क वापस कराने, सभी लेन-देन का सही हिसाब देने, मानसिक एवं आर्थिक नुकसान का मुआवजा देने तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
उसने शिकायत में कहा है कि यदि 7 दिनों के भीतर मामले में उचित और न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई तो वह Banking Ombudsman, आर्थिक अपराध शाखा (EOW), उपभोक्ता न्यायालय और उच्च न्यायालय की शरण लेगा।
नोट: बैंक शाखा प्रबंधक, कर्मचारियों और रेपो एजेंसी से जुड़े लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता की ओर से दी गई शिकायत पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित बैंक प्रबंधन या अन्य पक्ष का जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।