रायपुर: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जांजगीर-चांपा जिले में स्वच्छता को जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन से जोड़ते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जा रही है। गांवों में अब केवल सफाई अभियान चलाने के बजाय कचरे के स्रोत स्तर पर पृथक्करण, घर-घर नियमित संग्रहण, वैज्ञानिक निपटान और प्लास्टिक मुक्त वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में 15 अगस्त 2026 तक जिले की प्रत्येक जनपद पंचायत से एक ग्राम पंचायत को 100 प्रतिशत कचरा प्रबंधन एवं स्वच्छता गतिविधियों से जोड़कर मॉडल स्वच्छता ग्राम के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से 30 अक्टूबर 2026 तक जिले की 68 ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था से कवर किया जाएगा।
अभियान के प्रथम चरण में नवागढ़ जनपद पंचायत के करमंदी, बलौदा के जुनाडीह, बम्हनीडीह के भागोडीह, अकलतरा के अमलीपाली और पामगढ़ के जोगीडीपा ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता दी गई है। इन ग्राम पंचायतों में घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर कचरे के पृथक्करण, परिवहन और उचित निपटान तक की पूरी व्यवस्था को व्यवस्थित किया जा रहा है।
अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण है। प्रत्येक घर में गीला, सूखा, सेनेटरी तथा विशेष अथवा खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए चार रंगों के डिब्बों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरे डिब्बे में गीला, नीले में सूखा, लाल में सेनेटरी तथा काले डिब्बे में विशेष/खतरनाक कचरा रखा जाएगा। इससे कचरे के पुनर्चक्रण, कम्पोस्टिंग और सुरक्षित निपटान को बढ़ावा मिलेगा।
चयनित ग्राम पंचायतों में नियमित घर-घर कचरा संग्रहण सुनिश्चित किया जाएगा। स्वच्छाग्रही दीदियां और कचरा संग्रहण दल निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक घर से कचरा एकत्र करेंगे। व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के लिए यूजर चार्ज की वसूली को भी प्रभावी किया जाएगा। ग्रामीणों को यह समझाया जा रहा है कि यूजर चार्ज गांव की स्वच्छता व्यवस्था को नियमित एवं आत्मनिर्भर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था की सतत निगरानी के लिए निगरानी समितियों का गठन किया जाएगा। समिति घर-घर कचरा संग्रहण, कचरा पृथक्करण, नियमित उठाव, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और प्लास्टिक नियंत्रण जैसी गतिविधियों की निगरानी करेगी। पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिव, स्वच्छाग्रही दीदियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीणों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है, ताकि स्वच्छता अभियान सरकारी प्रयास के साथ सामुदायिक जिम्मेदारी भी बने।
चयनित ग्राम पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा कपड़े एवं अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, नालियों और खाली स्थानों पर कचरा फेंकने तथा कचरा जलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए जागरूकता के साथ आवश्यक कार्रवाई की व्यवस्था भी की जा रही है।
स्वच्छता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में स्वच्छाग्रही दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे घर-घर कचरा संग्रहण के साथ ग्रामीणों को कचरा अलग-अलग रखने, खुले में कचरा नहीं फेंकने, नियमित रूप से कचरा संग्रहण दल को कचरा देने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे गांवों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता के साथ व्यवहार परिवर्तन भी दिखाई दे रहा है।
जांजगीर-चांपा में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत चलाया जा रहा यह अभियान गांवों में स्वच्छता को स्थायी स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 15 अगस्त तक प्रत्येक जनपद पंचायत में एक मॉडल स्वच्छता ग्राम और 30 अक्टूबर तक 68 ग्राम पंचायतों को कवर करने का लक्ष्य पूरा होने पर जिले में कचरा प्रबंधन की विकेंद्रीकृत और जनभागीदारी आधारित व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।