रायपुर। प्रदेशभर में असाक्षरों की पहचान के लिए सघन घर-घर सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है। ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के शहरी वार्डों में टीमें घर-घर पहुंचकर 15 साल से अधिक आयु के ऐसे लोगों की जानकारी जुटा रही हैं, जो औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए हैं। इसके साथ ही साक्षरता अभियान से जुड़ने वाले स्वयंसेवी शिक्षकों की भी पहचान और पंजीयन किया जा रहा है।
अभियान की खास बात यह है कि, इसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को भी सीधे जोड़ा गया है। हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के विद्यार्थी स्थानीय युवाओं और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ घर-घर जाकर असाक्षरों का चिन्हांकन और उनका डेटा संकलित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को साक्षरता की मुख्यधारा से जोड़ना है, जो किसी कारण से स्कूली शिक्षा हासिल नहीं कर सके।
विद्यार्थियों को अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ने के लिए राज्य शासन ने विशेष प्रावधान किया है। इसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थी 10 निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने में सहयोग करते हैं तो उन्हें स्थानीय और बोर्ड परीक्षाओं में 10 बोनस अंक दिए जाएंगे। इस प्रावधान का स्कूलों के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी अभियान से जुड़ सकें।
पखवाड़े के तहत ‘उल्लास गृह कार्य’ गतिविधि भी शुरू की गई है। इसमें विद्यार्थी अपने परिवार के निरक्षर दादा-दादी, नाना-नानी या माता-पिता के साथ रोज कम से कम 15 मिनट बैठकर उन्हें अक्षर पढ़ना-लिखना और समाचार पत्र की सुर्खियां पढ़ना सिखाएंगे।
इसके जरिए बच्चों में सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ परिवार के भीतर ही साक्षरता की शुरुआत करने पर जोर दिया जा रहा है।
शाम को साक्षरता केंद्रों का अवलोकन
सर्वेक्षण के साथ साक्षरता केंद्रों की गतिविधियों की निगरानी भी की जा रही है। आज शाम संचालित होने वाले साक्षरता केंद्रों का स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंच-सरपंचों और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा अवलोकन किया जाएगा।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरणों को सर्वेक्षण का काम शत-प्रतिशत पूरा करने और अधिक से अधिक स्वयंसेवी शिक्षकों को पंजीकृत करने के निर्देश दिए हैं।