धान से सब्जी की खेती तक, ड्रिप सिंचाई ने हरीशचन्द्र को बनाया सफल किसान

​रायपुर: ड्रिप सिंचाई (टपका सिंचाई) तकनीक ने आधुनिक खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति और तकदीर को पूरी तरह बदल दिया है। छत्तीसगढ़ के किसानों ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर इस आधुनिक प्रणाली के जरिए सब्जियों और फलों की खेती में बंपर मुनाफा कमाया है। ​कहते हैं कि अगर सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक का साथ मिल जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि आर्थिक समृद्धि का जरिया बन सकती है। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर विकासखण्ड के सुदूर ग्राम तारागांव निवासी कृषक हरीशचन्द्र पिता भादूराम ने। कभी सीमित आमदनी और पारंपरिक धान की खेती से जूझने वाले हरीशचन्द्र आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।
पहले हरीशचन्द्र मुख्य रूप से धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। मेहनत के मुकाबले आमदनी बहुत सीमित होती थी, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए वे खेती में कुछ नया और लाभप्रद करना चाहते थे।
हरीशचन्द्र की सोच को धरातल पर उतारने का काम किया उद्यानिकी विभाग ने। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों और विशेष रूप से ड्रिप (टपक) सिंचाई प्रणाली के फायदों से अवगत कराया। मार्गदर्शन से उत्साहित होकर हरीशचन्द्र ने 1 हेक्टेयर क्षेत्र में बरबटी, करेला और लौकी जैसी उच्च मांग वाली सब्जी फसलों की खेती शुरू की।
​ड्रिप सिंचाई अपनाने से खेत में पानी और पोषक तत्वों की बर्बादी रुकी और फसलों को जरूरत के हिसाब से संतुलित पानी मिला। इसका सीधा असर उत्पादन और सब्जियों की गुणवत्ता पर दिखाई देने लगा।
हरीशचन्द्र की बाड़ी में तैयार लौकी, करेला और बरबटी की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन रही कि स्थानीय बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी। धान की फसल का महीनों इंतजार करने के बजाय, अब सब्जी उत्पादन से उन्हें नियमित आधार पर नकद आय प्राप्त होने लगी है।कम समय में बेहतर मुनाफा मिलने से उनके परिवार का जीवनस्तर सुधरा है और आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
​कृषक हरीशचन्द्र ने कहा कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और ड्रिप सिंचाई तकनीक ने खेती के प्रति मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया। अब मैं पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कम समय में अधिक लाभ देने वाली व्यावसायिक फसलों पर ध्यान दे रहा हूँ। इस बदलाव ने मेरे परिवार को आर्थिक सुरक्षा दी है।
​हरीशचन्द्र की इस सफलता ने सिर्फ उनकी जिंदगी ही नहीं बदली, बल्कि ग्राम तारागांव और आसपास के अन्य किसानों में भी नई उम्मीद जगाई है। उनकी सफलता को देखकर अब गाँव के अन्य कृषक भी वैज्ञानिक कृषि तकनीकों और सब्जी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हरीशचन्द्र भी एक सजग किसान की भूमिका निभाते हुए अपने अनुभवों के जरिए दूसरों को आधुनिक एवं उन्नत खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं।