आईपीसी ने पीएमबीआई और एनआईपीईआर हाजीपुर के साथ दवा गुणवत्ता और अनुसंधान को लेकर किए दो अहम समझौते

नई दिल्ली। भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) ने दवा की गुणवत्ता, अनुसंधान और रोगी सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) और राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर), हाजीपुर के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये सहयोग देश में फार्मास्युटिकल मानकों और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई दिशा देने की पहल के रूप में देखे जा रहे हैं।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग और पीएमबीआई के बीच हुए समझौते का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों (पीएमबीजेके) में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को मजबूत बनाना है।
इस साझेदारी के तहत पीएमबीआई द्वारा जन औषधि दवाओं के यादृच्छिक बैच परीक्षण के लिए आईपीसी को भेजे जा सकेंगे, जिससे गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच संभव होगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय फार्मुलरी ऑफ इंडिया (एनएफआई) के उपयोग को बढ़ावा देकर दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को संस्थागत रूप देने पर जोर दिया जाएगा।
इस समझौते के अंतर्गत फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों को भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए पीएमबीजेके में फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (पीवीपीआई) का क्यूआर कोड और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-3024 प्रदर्शित किया जाएगा।
इस पहल से प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (एडीआर) की रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा और रोगी सुरक्षा में सुधार होगा। इसके अलावा फार्मासिस्टों और हितधारकों के लिए दवाओं के सही उपयोग, एडीआर रिपोर्टिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनकी भूमिका पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
आईपीसी और एनआईपीईआर हाजीपुर के बीच हुए एमओयू का उद्देश्य फार्मास्युटिकल अनुसंधान, अकादमिक सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। यह संस्थान फार्मास्युटिकल विश्लेषण, बायोलॉजिक्स और नैदानिक अनुसंधान में विशेषज्ञता रखता है।
इस सहयोग के तहत अशुद्धियों की प्रोफाइलिंग, विशेषकर नाइट्रोसेमाइन जैसी जीनविषाक्त अशुद्धियों पर संयुक्त शोध किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं के साथ इनके संबंध को समझकर साक्ष्य-आधारित मानक तैयार करना है।
दोनों संस्थान बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और सेल एवं जीन थेरेपी जैसी उभरती चिकित्सा तकनीकों के लिए विश्लेषणात्मक विधियों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल विकसित करेंगे। इनका लक्ष्य इन्हें भारतीय फार्माकोपिया में शामिल करना है ताकि उच्च गुणवत्ता वाले मानक सुनिश्चित किए जा सकें।
इस सहयोग के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही संकाय आदान-प्रदान, इंटर्नशिप और फैलोशिप कार्यक्रमों को भी बढ़ावा मिलेगा। शोध पत्रों, प्रशिक्षण सामग्री और शैक्षणिक प्रकाशनों का संयुक्त प्रकाशन भी किया जाएगा, जिससे फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान में गुणवत्ता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
ये समझौता ज्ञापन भारत के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने, दवा गुणवत्ता सुनिश्चित करने, रोगी सुरक्षा बढ़ाने और फार्मास्युटिकल मानकों में नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे देश की नियामक क्षमता और वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल नेतृत्व को भी मजबूती मिलेगी।