नई दिल्ली । उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में सिंधी भाषा में संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया। यह विमोचन सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर किया गया।
उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषी समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिंधी दुनिया की प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसकी साहित्यिक परंपरा वेदांतिक दर्शन और सूफी विचारों के अनूठे संगम को दर्शाती है, जो प्रेम, एकता और भाईचारे के मूल्यों को बढ़ावा देती है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार विशेष रूप से देवनागरी लिपि में सिंधी भाषा में संविधान का प्रकाशन भाषाई समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने संविधान को केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की जीवंत आत्मा बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में संविधान उपलब्ध होने से नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी और शासन में विश्वास भी मजबूत होता है।
उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संविधान को विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों और शासन के बीच की दूरी कम होती है।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि संविधान को बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली सहित कई भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, जो भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं।
सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभाजन के कठिन दौर में यह भाषा एकता और दृढ़ता का प्रतीक बनी रही। उन्होंने बताया कि 1967 में 21वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में निहित है और भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की महत्वपूर्ण वाहक हैं। सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्रालय और क्षेत्रीय भाषा अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि इस तरह की पहल नागरिकों को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करने में सहायक होगी।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, सांसद शंकर लालवानी और विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।